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Brahman Pandit Sanskrit Status: ब्राह्मणों की महिमा:

पौराणिक कल से और इतिहास मे ब्राह्मण अपने ज्ञान और त्याग से समाज के उत्थान और सभ्य समाज की स्थापन की। शस्त्र से शास्त्र तक का ज्ञान देने वाले ब्राह्मण पंडित समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले आने वाले वाले ब्राह्मणों की महिमा शस्त्रों मे भी लिखी गई है।

इस पोस्ट मे आपके लिए ब्राह्मण पंडित संस्कृत स्टेटस श्लोक लिखा है। ब्राह्मण पंडित भाइयों के लिए यह बहुत सानदार पोस्ट है जो आपको बहुत पसंद आएगा। कमेन्ट मे जय भगवान परशुराम जरूर लिखे।

राम जी भी कह रहे हैं । हमारा नाम अगर राम है तो ब्राह्मणों के प्रताप से है। ये हम इसलिए नहीं कह रहे क्योंकि हम ब्राह्मण है नहीं। शास्त्र कह रहे कह रहे हैं एक महात्मा हमें बताया करते थे।

BRAHMAN SANSKRIT SHLOK STATUS:

ब्राम्हणों की महिमा के बारे में बताना चाहूंगा-
ब्राम्हण पैर पताल छलो, और
ब्राम्हण ही साठ हजार को जारो,
ब्राम्हण सोख समुद्र लियो और
ब्राह्मण ही यदुवंश उजारो,
ब्राम्हण लात हनि हरि के तन
ब्राम्हण ही क्षत्रिय दल मारो
ब्राम्हण से जिन बैर करे कोई
ब्राम्हण से परमेश्वर हारो।।

अर्थात- राजा बली ने जब तीनों लोको को अपने अधीन कर लिया था, तब भगवान बामन ने अपने पैरों से दो लोकों (आकाश, पाताल) को और तीसरा पैर बलि के ऊपर रखकर उनका उद्धार किया। अगस्त मुनि जी ने सारा समुद्र सोख लिया था। कपिल मुनि के श्राप से सगर जी के साठ हजार पुत्र भस्म हो गए थे। भगवान परशुराम जी ने पृथ्वी को कई बार क्षत्रियों से विहीन कर दिया था।

दुर्वासा ऋषि ने यदुवंशीयो को श्राप देकर यदुवंश को नष्ट कर दिया था। भृगु ऋषि ने भगवान विष्णु के वक्ष स्थल पर अपने पैर से प्रहार कर दिया। इसलिए ब्राह्मणों का कभी विरोध नहीं करना चाहिए। 

ब्राह्मणों को धरती पर भूदेव कहा जाता है। ब्राह्मण पंडित सनातन को एक सूत्र मे बांधने के काम करते या रहे है। इतिहास मे हमेशा से ब्राह्मणों का वर्चस्व रहा है।

 

विप्र धेनु सुर संत हित लीन मनुज अवतार,
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गोपार।

अर्थात:- रामचरित मानस में भी गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है, ब्राह्मण, गो, देवता और संतों के लिए भगवान ने मनुष्य का अवतार लिया। वे माया और उसके गुण और बाहरी तथा भीतरी इन्द्रियों से परे हैं। उनका दिव्य शरीर अपनी इच्छा से ही बना है , किसी कर्म बंधन से परवश होकर त्रिगुणात्मक भौतिक पदार्थों के द्वारा नहीं।

आदिकाल से ही ब्राह्मणों की महिमा चली आई। ब्राह्मण कोई साधारण नहीं है। ब्राह्मण हमेशा सत्य ज्ञान के पक्ष मे रहे हैं, अगर उन्हे सत्ता और धन का लोभ होता हो वो खुद राज करते। ब्राह्मण पंडितों मे हमेशा समाज को अंधकार से प्रकाश की ऊर ले जाने का कार्य किया है।
सच्चे ब्राह्मणों के लिए यह पंक्तियाँ एकदम सटीक लिखी गई है। यह हमे इंस्टाग्राम से मिल।

 

BRAHMAN PANDIT SANSKRIT STATUS:

शिखा जिसकी धरोहर है
तिलक से जो अलंकित है
चमकता भाल दिनकर सा
जो अपराधों से वंचित है
जो शम्भू सा विनाशी है
जो विष्णु सा हृदय कोमल
है जिसमे तेज ब्रह्मा का
वो ब्राह्मण सर्व वंदित हैं।

Shikha jisaki dharohar hai
Tilak se jo alankit hai
chamakata bhal dinakar saa
Jo aparadho se vanchit hai
J shambhu saa vinasi hai
Jo vrishnu saa hriday komal
Hai jisame tej brahma ka
Vo Brahman sarva vandit hain.

ब्राह्मणों से मित्रता ही हितकारी होता है,
क्योंकिब्राह्मण का क्रोध विनाशकारी होता है।

 

brahman pandit sanskrit status

ब्राह्मण ही प्रथम हैं, ब्राह्मण ही अनंत हैं।
पंडित ही आरम्भ हैं, ब्राह्मण ही अंत हैं।
ब्राह्मण प्रचंड हैं, करता जब कोई अधर्म हैं।

 

वाधीनाजगत्सर्वं मन्त्राधीनाश्च देवता:।
ते मन्त्रा: ब्राह्मणाधीना:तस्माद् ब्राह्मण देवता।

अर्थात- सारा संसार देवताओं के अधीन होता है तथा देवता मंत्रों के अधीन हैं और मंत्र ब्राह्मण के अधीन हैं इसलिए धरती पर ब्राह्मण को देवता के माने जाने का कारण ये भी है।

 

योद्धा मे परशुराम,
इतिहासकारों मे वेदव्यास,
राजनीति मे चाणक्य,
दान मे दधीचि,
क्रोधी मे दुर्वासा,
शांति मे वशिष्ठ,
स्वाभिमान मे सुदामा,
पंडित मे रावण,
वक्त के वक्त बताए है की ब्राह्मण ने कितने तख्त हिलाए है।

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